Table of Contents

केदारनाथ में यात्रा (travel in Kedarnath)

केदारनाथ का मंदिर के बारे मे कुछ महत्वपूर्ण जानकारी जानिए
kedarnath mandir

आज के व्यस्त जीवन मे हमारे और आप के लिए कही भी धार्मिक जगहो पे यात्रा करना बहुत बड़ी बात हो गई है, क्योकि हमलोग अपने जीवन मे पैसे को इतना महत्व देने लगे है, की उसके आगे हमलोग को कुछ दिखता ही नही है, हमलोग किसी को भी बहुत ज्यादा समय भी नही देते है, क्योकि हमलोग को पैसे कमाना है, ओर आगे बढ़ना है, पर एक समय के बाद जब इंशान पैसे कमाते-कमाते थक जाता है, तब वो सोचता है की आज तक मैंने अपनी जीवन मे क्या ही किया, इस लेख का मतलब ये नही है की, आप पैसे कमाना ही छोर दे, पैसे कमेए और ज्ञान भी अर्जित करे, जिसके लिए आप धार्मिक जगहो पर जाए, और हमारे भारत देश मे ऐसे बहुत सी जगह है, जहा आप जाकर ज्ञान की प्राप्त कर सकते है, जहा आपको अपनी जीवन मे यात्रा करने जाना चाहिए, ताकि आप जान सको की हमारे देश के वीरों ने क्या-क्या किया है, कितने बलिदान दिये है, कितने कष्ट सहे है, अपने देश के लिए और ऐसे भी बहुत जगह है।

आज भी ऐसे बहुत से जगह है, जहा आपको भगवान के होने का प्रमाण मिलता है, इसलिए आपको धार्मिक जगह और ऐतिहासिक स्थान पे यात्रा करते रहने चाहिए, जिस से आपको बहुत सारे ऐतिहासिक बाते और धार्मिक जगहो से ज्ञान की प्राप्ति होगी जिस से आपके जीवन मे आपको बहुत मदद मिलेगी। आज ऐसे ही एक अपने एक यात्रा के बारे मे बात करेंगे जो की केदारनाथ मे यात्रा (travel in kedarnath) किए है।

ऐसे तो केदारनाथ मंदिर साल के 6 माह के लिए खुली हुई रहती है, क्योकि बाकी 6 माह यहा के मौसम अनुकूल नही होते है, पर यहा के रहने वाले से जब इन बातों की मैंने पुष्टीकरण की तो यहा के भक्तो का कहना था, एक तो मौसम अनुकूल होने के कारण ये मंदिर बंद रहती है, पर साथ ही बाकी के 6 माह के लिए भगवान शिव केदारनाथ मंदिर की भूमि पे रहने आते है, जो पांडव की द्वारा किए गए अपने पापो के प्रायश्चित का निवारण करवाने हेतु निर्माण किया था, जो भगवान शिव उनसे रुष्ट होने के कारण उनसे मिलने के इच्छुक्क नही थे क्योकि पांडव ने  ब्रह्मणो और अपने परजनों की हत्या किए थे, जो भगवान शिव के नजर मे बहुत बड़ा पाप था, इसलिए उन से भागते-भागते भगवान शिव केदारनाथ के भूमि पे मिले थे, उन्होने ओर बताया की केदारनाथ मंदिर आठवि शताब्दी मे मदिर की बहुत बुरी हालत होने के कारण आदि शंकराचार्य ने केदारनाथ मंदिर की दोबारा निर्माण करवाया था, जो की उनकी शमाधी भी यही स्थापित है, जो की आदि शंकराचार्य शमाधी के नाम से प्रचलित है, जिनकी भी पुजा की जाती है, वहा के भक्तो का मानना है, की आदि शंकराचार्य भगवान शिव के एक रूप थे। और उन्होने बताया की ये साल के 6 माह खुले होने के कारण यहा एक बार मे ही भक्तो की भीड़  उमर कर आती है, जिस से उन्हे अपने केदारनाथ यात्रा (Kedarnath Yatra) करने मे बहुत संकट आती है, पर वहा के कुछ यात्रीवों ने बताया की वो केदारनाथ टूर पैकेज (Kedarnath tour package) बूक कर के आते है जिन से उन्हे अपनी यात्रा मे ज्यादा संकट नही आती है, और वो केदारनाथ मे यात्रा (travel in kedarnath) आसानी से करते है।

केदारनाथ मे लोग बहुत ही मददगारी होते है जिन से आपको उन सब से भी मदद मिलती रहती है, इस मंदिर के पुजारिवो ने बतया की यह मंदिर 12 ज्योतृलिंगा (12 Jyotrilingas), पाँच केदार (Panch Kedar), छोटा चार धाम यात्रा(Char Dham Yatra), दो धाम यात्रा (Do Dham Yatra) के यात्रावों मे से एक प्रमुख यात्रा है, जो की भगवान शिव को समर्पित है, ये मंदिर हिन्दू धर्म के पवित्र स्थलो मे से एक महत्वपूर्ण स्थल है, जहा आपको गौरीकुण्ड देखने को मिलता है, इस कुंड का जल गर्म रहता है, जहा पे भक्त स्नान करना बहुत पसंद करते है, इस कुंड की खाश बात ये भी है, की इस कुंड मे स्नान करने से आपके सारे दुख, तकलीफ और बीमारी दूर हो जाते है, गौरीकुण्ड चरों ओर से बर्फ से घिरा हुआ है, बावजूद इसके यहा का जल गरम रहता है, यहा के पुरोहितों से पूछने के बाद यह पता चला की ये वही कुण्ड है, जहा माँ पार्वती स्नान किया करती थी, और जहा माँ पार्वती ने अपने पुत्र गणेशजी को अपने शरीर के मैल से बनाई थी, क्योकि माँ पार्वती इस कुण्ड पे स्नान करती थी, इसलिए इस कुण्ड का नाम उनके नाम पर रखा गया है।  

एक और कथा भगवान शिव के चमत्कारों मे से ये भी है, ऐसे बहुत सारे चमत्कार देखने को यहा आपको मिल जाएगा जैसे हजारो वर्षो से ये मंदिर बर्फ के चादर ओढ़े हिमालय की गोद मे छुपी हुई थी, बावजूद उसके केदारनाथ मंदिर को कुछ नही हुआ, यहा के रहने वाले का ऐसा मानना है, की भगवान शिव उस समय तक केदारनाथ मंदिर मे ही वाश करते थे, जो सीधा स्वर्ग से मिलता है, इसी रास्ते से पांडव मे से एक युधिष्ठिर और उनके साथ एक कुत्ता स्वर्ग की यात्रा किए थे।

केदारनाथ मे यात्रा (travel in kedarnath) के बाकी यात्रीवों ने बताया की गौरीकुण्ड से ही आपका 16 किलोमीटर का पैदल यात्रा शुरू हो जाती है, जो की आपका आधार शिविर है, इस मार्ग मे आपको प्राकृतिक सौंदर्य देखने को मिलती है, जो की आप अपने बरे-बरे शहरे के बिल्डिंग मे देखने को नही प्राप्त होगी, इस यात्रा मे जो आप अनुभव करोगे वो कही नही करोगे, आपको लगेगा की आप स्वर्ग मे ही हो, इसकी मनोहक दृश्य देख कर आपका मन मोह लेगा ये दृश्य, प्राकृतिक प्रेमिवों द्वारा केदारनाथ मे यात्रा (travel in kedarnath) करना बहुत पसंद किया जाता है। 

केदारनाथ का ट्रेक करने के बाद आपको बहुत अच्छा महसूस होता है, जैसे की आप पूरे ऊर्जा से भरे हुए रहते हो, जिस से आपका कोई भी काम करने मे आपका मन लगता है।

Article Tags
Article Category

Leave a Reply