केदारनाथ मंदिर की कुछ रोचक बातें

केदारनाथ मंदिर की कुछ पौराणिक कथा जो की पूरे रहस्य से भरा है

kedarnath mandir

Table Of Contents

केदारनाथ मंदिर जो की उत्तराखंड राज्य के गढ़वाल क्षेत्र मे हिमालय की गोद मे छिपा हुआ है, जिसकी उचाई समुद्र के स्तर से लगभग 3283 मिटर है, जो की हिन्दू धर्म के पवित्र स्थलो मे से एक महत्वपूर्ण स्थल है, जहा पे लगभग हर वर्ष भक्त की शंख्या लाखो तक चली जाती है, क्योकि केदारनाथ मंदिर वर्ष के बस 6 माह के लिए खुले होते है, जिसके कारण यहा भक्तो को भगवान शिव के दर्शन करने मे बहुत सारी तकलीफ़ों का सामना करना परता है, जिस के कारण भक्त केदारनाथ टूर पैकेज (kedarnath tour package) का उपयोग कर के केदारनाथ मंदिर की यात्रा करना बहुत पसंद करते है, जिस से उनकी केदारनाथ यात्रा (kedarnath yatra) मंगलमय हो जाए बिना कोई संकट के, केदारनाथ मंदिर की बहुत सारी ऐसी बाते है, जो केदारनाथ यात्रा को  रोचक बनाता है, जिसे सुन कर भक्त और भी उत्साहित हो जाते है केदारनाथ मंदिर के दर्शन पाने के लिए, यह मंदिर बहुत मुख्य धामों का एक महत्वपूर्ण धामों मे से आता है, जैसे पंच केदार (panch kedar), 12 ज्योतृलिंगा (12 jyotrilinga), दो धाम यात्रा (do dham yatra) और छोटा चार धाम यात्रा (char dham yatra) इन सभी धामों का एक प्रमुख धाम है केदारनाथ मंदिर। 

केदारनाथ मंदिर पांडव के द्वारा निर्माण किया गया है, क्योकि उन्होने बह्रमाणो की हत्या की थी, तो उन्होने इस पाप के प्रायश्चित करने के लिए पंच केदार का निर्माण किए थे, जो की केदारनाथ मंदिर उन पंच केदारों मे से एक प्रमुख मंदिर है, जहा भगवान शिव की पीठ की आराधना किया जाता है, पर दोबारा आठवी शताब्दी मे इस मंदिर का निर्माण आदि शंकराचार्य द्वारा किया गया था, फिर आदि शंकराचार्य ने वही समाधि ले लिए थे, जो की भक्तो ने वही उनकी समाधि का स्थापना करवा दिये थे, और आज हमलोग उसे आदि शंकराचार्य समाधि के नाम से जानते है। केदारनाथ मंदिर की कहानी आज से नही बल्कि कई वर्षो से चली आ रही है, जो हमलोग आज के समय मे जाने है, वो भी पूरी जानकारी किसी के पास नही है, सब के पास थोड़ा-थोड़ा ही जानकारी है। केदारनाथ मंदिर मे भगवान शिव की आराधना होती है, जिसके कारण हमलोग को कई सारे चमत्कार देखने को मिलते है, जैसे की केदारनाथ मंदिर कई वर्षो से बर्फ की चादर ओढ़ी हिमालय की गोद मे छिपी हुई थी पर उसे कुछ नही हुआ,किंवदंती है की उस समय भी भगवान शिव इस मंदिर मे निवास करते है थे, जो की अब केदारनाथ मंदिर के नाम से जाना जाता है।

किंवदंती है की अगर आप अपने जीवन मे पाप किए हो तो आपको भी केदारनाथ की यात्रा करनी चाहिए, ताकि आपको आपने किए गए पापो का प्रायश्चित करने का मौका मिले और आप अपने जीवन मे कभी भी दोबारा पाप न करे।

केदारनाथ की यात्रा गौरीकुण्ड से शुरू हो जाती है, गौरीकुण्ड से केदारनाथ यात्रा का आधार शिविर है जहा से आपको लगभग16 किलोमीटर की पैदल दुर्गम चड़ाई करनी परती है, गौरीकुण्ड मे मौजूद कुण्ड माता पार्वती के नाम पे रखा हुआ है, जिस मे भक्त स्नान करना बहुत पसंद करते है, ऐसा माना जाता है की इस कुण्ड मे स्नान के उपरांत आपके सारे कष्ट और दुख दूर हो जाते है जो भी आपको केदारनाथ मंदिर की यात्रा करने के दौरान हुए है, गौरीकुण्ड से ही आपको पालकी, घोडा और खच्चर जैसे वाहन का उपयोग कर सकते हो, जिस से आपको अपनी यात्रा मे काफी मदद मिलती है,गौरीकुण्ड मे ही आप खुद के लिए सवारी किराए पर ले सकते हो क्योकि उसके आगे आपको सवारी की शुविधा नही प्राप्त होगी उसके बाद आपको पैदल ही यात्रा करना परता है,खाने पीने का दुकान आपको मिल जाएगी जिस से आप कुछ खरीद कर खा सकते है, इस यात्रा मे आपको अपनी स्वास्थ्य का खास ध्यान रखना परता है,क्योकि आप जैसे-जैसे उपर जाओगे तो आपको ऑक्सिजन की कमी होने लेगेगी जिस के कारण आपको सांस लेने मे बहुत दिकत होगी आपको धैर्य रख कर आपको अपनी यात्रा पूरा करना होगा।

भगवान शिव केदारनाथ मंदिर मे रहने से पहले बद्रीनाथ धाम मे रहते थे, पर जब भगवान विष्णु पहाड़ो मे भटक रहे थे, और वो खुद के रहने के लिए निवास देख रहे थे, तब उनकी नजर बद्रीनाथ पे परी जो अलंकनदा नदी के तट पे बसा हुआ जो बहुत ही सुंदर जगह था, पर जब उन्हे पता चला की ये भगवान शिव और माता पार्वती का निवास है, तो उन्होने एक तरकीब लगाई वो देख रहे थे की भगवान शिव अपने घर को छोड़ कर कब बाहर जाएगे, जब भगवान विष्णु देखे की भगवान शिव अपने निवास को छोड़ बाहर की ओर जा रहे है, और माता पार्वती स्नान करने के लिए जा रही है, तो वो माता पार्वती के रास्ते मे एक नन्हें सिशु के रूप लेट गए और रोने रोने जब माता पार्वती ने उस नन्हें सिशु को देखा तो उन्होने उसे अपने गोद मे उठा लिया और बद्रीनाथ मंदिर के अंदर ले जा कर दूध पीला कर सुला दी और वो स्नान करने चली गई, जब भगवान शिव और माता पार्वती वापस आए तो उन्होने देखा की उनके निवास का द्वार अंदर से बंद था, तब माता पार्वती ने सारी बात बताई, इस पर  भगवान शिव बोले इस बारे मे, मै कुछ नही बोल सकता हु क्योकि ये आप और आपकी बच्चे की बात है, इतना कह कर वहा से चले गए, और फिर भगवान शिव और माता पार्वती ने केदारनाथ मंदिर को अपना निवास बनया, इस तरह भगवान विष्णु ने अपना निवास बद्रीनाथ को बना लिए। 

Leave a Reply

    © 2024 Crivva. All Rights Reserved.